हाईकोर्ट ने जिला दंडाधिकारी जबलपुर पर लगाया 20 हजार रुपए का जुर्माना

जिला बदर का आदेश देते समय कट और पेस्ट की प्रवृत्ति पर कोर्ट ने लगाई फटकार

रिपब्लिक टुडे, जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जिला बदर से जुड़े एक मामले में जिला दंडाधिकारी जबलपुर को विवेकहीनता से आदेश पारित करने पर 20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। जस्टिस जीएस आहलुवालिया की एकलपीठ ने जिला दंडाधिकारी को 30 दिन के भीतर जुर्माने की रकम हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता चाहे तो उक्त रकम ले सकता है।
हाईकोर्ट ने जिला दंडाधिकारी द्वारा 28 जुलाई 2020 को जारी उस आदेश को भी निरस्त कर दिया जिसमें याचिकाकर्ता के खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई की गई थी। इसके बाद याचिकाकर्ता ने संभागायुक्त के समक्ष उक्त आदेश की अपील पेश की थी। संभागायुक्त ने 11नवंबर 2020 को अपील खारिज कर दी थी।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में टिप्पणी करते हुए कहा कि जिला दंडाधिकारी ने आदेश जारी करते समय अपने विवेक का इस्तेमाल नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि जिला दंडाधिकारी के आदेश से स्पष्ट है कि उन्होंने दुर्भावना से प्रेरित होकर उक्त कार्रवाई की है। कोर्ट ने कहा कि इसके पहले भी जिला दंडाधिकारी ने जो जिला बदर का आदेश पारित किया था उससे स्पष्ट है कि उन्होंने प्रकिया पालन में केवल औपचारिकता निभाई है। कोर्ट ने कहा कि पूर्व आदेश की कॉपी को कट और पेस्ट करने और अतार्किक फैसले को स्वीकृति नहीं दी जा सकती।
हाईकोर्ट ने कहा कि किसी को भी उसके घर से हटाना उसे उसकी आजीविका से वंचित करना है, इसलिए अधिकारी आदेश देते समय कट-पेस्ट की प्रवृत्ति को अपनाने की बजाय तार्किक निर्णय पारित करें।
हाईकोर्ट ने इस मामले में संभागायुक्त की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अपील का निराकरण करना महज औपचारिकता नहीं है। अपीलीय अधिकारी को यांत्रिकता पूर्वक नहीं वरन प्रकरण की सूक्ष्म जांच के बाद उसकी गंभीरता देखते हुए फैसला करना चाहिए।
क्या है मामला
जबलपुर के डुमना रोड स्थित ककरतला में रहने वाले रज्जन यादव पर विभिन्न आपराधिक प्रकरणों के एवज में जिला दंडाधिकारी ने 16 नवंबर 2016 को जिला बदर की कार्रवाई की थी। इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने 26 मार्च 2018 को याचिकाकर्ता के खिलाफ एनएसए की कार्रवाई की अनुशंसा की। जिला दंडाधिकारी ने 29 सितंबर 2018 को रज्जन के खिलाफ एनएसए की कार्रवाई के तहत जबलपुर सहित मंडला, डिंडोरी, नरसिंहपुर, सिवनी, कटनी, दमोह और उमरिया जिले में जिला बदर का आदेश पारित किया। इस आदेश के खिलाफ संभागायुक्त के समक्ष अपील पेश की गई। संभागायुक्त ने यह कहते हुए जिला दंडाधिकारी का आदेश निरस्त कर दिया कि उन्होंने इस दौरान याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर नहीं दिया और पुलिस कर्मियों के बयान भी दर्ज नहीं किए। संभागायुक्त ने मामला वापस जिला दंडाधिकारी को भेज दिया।
इसके बाद खमरिया पुलिस ने रज्जन के खिलाफ भादंवि की धारा 327, 294, 506 व अन्य के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया। पुलिस अधीक्षक की अनुशंसा के बाद 28 जुलाई 2020 को एनएसए के तहत एक साल के लिए जिला बदर का आदेश पारित कर दिया।
ये थी दलील
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वसंत डेनियल की ओर से दलील दी गई कि वर्ष 2017, 2018 और 2019 में एक भी आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं किया गया। अगले साल २०२० को केवल एक प्रकरण दर्ज किया गया और वह भी संगीन अपराध की श्रेणी में नहीं आता।
वहीं सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ पूर्व में भी एनएसए की कार्रवाई की गई। जिला बदर की कार्रवाई के बाद भी याचिकाकर्ता आपराधिक प्रकरणों में लिप्त रहा है। यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता के डर के चलते गवाह भी बयान दर्ज कराने नहीं आते।